
🕉️ आषाढ़ गुप्त नवरात्रि २०२६
📅 १५ जुलाई से २३ जुलाई २०२६
आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि श्रीविद्या साधकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस काल में अनेक साधक देवी की आंतरिक उपासना, जप, ध्यान और आत्मशुद्धि का विशेष संकल्प लेते हैं।
श्रीकुल परंपरा में इस गुप्त नवरात्रि को श्रीवाराही देवी की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। देवी वाराही को श्रीललिता त्रिपुरसुंदरी की दिव्य सेनापति कहा गया है। वे साधक की रक्षा करने वाली, विघ्नों का नाश करने वाली तथा आध्यात्मिक मार्ग में शक्ति प्रदान करने वाली देवी मानी जाती हैं।

🌸 श्रीवाराही देवी की उपासना का महत्व
- साधना में स्थिरता प्राप्त करने हेतु।
- भय, नकारात्मकता एवं मानसिक दुर्बलता से रक्षा के लिए।
- आत्मविश्वास एवं आध्यात्मिक शक्ति की वृद्धि हेतु।
- गुरु कृपा एवं देवी कृपा प्राप्त करने की भावना से।
- साधना मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना के रूप में।
🌼 गुप्त नवरात्रि में क्या करें?
🔸 प्रतिदिन प्रातः स्नान कर देवी का ध्यान करें।
🔸 घर के पूजा स्थान में दीपक एवं धूप अर्पित करें।
🔸 अपनी परंपरा एवं गुरु के निर्देशानुसार मंत्र जप करें।
🔸 सात्त्विक भोजन एवं संयम का पालन करें।
🔸 माता को लाल अथवा पीले पुष्प अर्पित करें।
🔸 प्रतिदिन देवी से आत्मिक उन्नति एवं सद्बुद्धि की प्रार्थना करें।

🪷 साधकों के लिए विशेष संदेश
गुप्त नवरात्रि बाहरी प्रदर्शन की अपेक्षा आंतरिक साधना का पर्व है। इस समय आत्मनिरीक्षण, मन की शुद्धि, गुरु के प्रति श्रद्धा तथा देवी के प्रति समर्पण का विशेष महत्व माना जाता है।
विभिन्न श्रीविद्या एवं तांत्रिक परंपराओं में साधना की विधियाँ अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए किसी भी विशेष साधना, मंत्र या अनुष्ठान को सदैव योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करना उचित माना जाता है।
🌺 जय माँ वाराही।
🌺 जय माँ ललिता त्रिपुरसुंदरी।



