🧿 श्रीवाराही गुप्त नवरात्री ( श्रीकुल ) 🧿🧿 श्रीछिन्नमस्ता गुप्त नवरात्री ( श्रीकाली कुल ) 🧿आषाढ गुप्त नवरात्री २०२६

🪷 आषाढ़ मास ( २०२६ ) में गुप्त नवरात्रि आ रही हैं । 
इस नवरात्री को श्रीवाराही नवरात्री कही जाती हैं । श्रीविद्या साधको के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण समय हैं । इस बार आषाढ़ मास गुप्त नवरात्री का समय हैं ,
🧘 १५ जुलाई २०२६ से २३ जुलाई २०२६ तक 🧘

यही गुप्त नवरात्री ” श्रीकुल ” में श्रीवाराही देवी के रूप में पूजा की जाती हैं ।

श्रीविद्या साधना में आज्ञाचक्र अर्थात रुद्र ग्रंथी विभेदीना जिसे कहा जाता हैं , वह है श्रीवाराही देवी । श्रीविद्या साधना में श्रीदत्तात्रेय श्रीपरशुरामजी जी ने भी इसे परंपरा में शामिल किया हैं । बिना श्रीवाराही साधना श्रीविद्या पूर्ण नहीं होती ।
श्रीललिता परमेश्वरी की सेनापती जिसे कहा जाता हैं , वह श्रीवाराही देवी हैं । हम इस गुप्त नवरात्री में , श्रीवाराही देवी की साधना पूजा करेंगे ।
यह दंडनाथा स्तम्भिनी शक्ति हैं।

आज इस लेख में हम आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में श्री कुल में श्रीवाराही देवी की जो गुप्त नवरात्री होती है । उनके कितने रूपो की पूजा इस नवरात्री के दिनों में होती हैं , उसे देखते हैं ।

श्रीविद्या साधना की शुरुआत जिस प्रकार बिना शिव आम्नाय जाने और बिना गुरूपादुका मंत्र दीक्षा होती हैं , उसी प्रकार श्रीवाराही देवी का भी हैं ।
इसमें हमने श्रीवाराही के देवलोकिय जगत के नाम भी दिए हैं । यह बात विशेष हैं ।
यह नाम श्रीविद्या अभ्यास पद्धति में अन्य कही पर उपलब्ध नहीं हैं ।

१) १५ जुलाई : लघु वाराही देवी ( लघुताम्बा )
२) १६ जुलाई : धूम्र वाराही देवी ( लिघशिताम्बा )
३) १७ जुलाई : वार्ताली देवी ( विघाय वाराही )
४) १८ जुलाई : अस्त्र वाराही देवी ( असुंघ वाराही )
५) १९ जुलाई : स्वप्न वाराही देवी ( घ्रितांग वाराही )
६) २० जुलाई : कीरात वाराही देवी ( कुंभहा वाराही )
७) २१ जुलाई : निग्रह वाराही देवी ( घोषिता वाराही )
८) २२ जुलाई : आश्वरूढ वाराही देवी ( घ्रिणा वाराही )
९) २३ जुलाई : तिरस्करणी वाराही देवी ( सांगोहित वाराही )
१०) २४ जुलाई : महावाराही देवी ( नादनाध्या वाराही )

धन्यवाद ।

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नमो ब्रह्मण्यदेवाय गोब्राह्मणहिताय च। जगद्धिताय कृष्णाय गोविन्दाय नमो नमः